
पश्चिम बंगाल में शुवेंदु सरकार का आगाज हो चुका है. कैबिनेट में दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, क्षुदीराम टुडू और निसिथ प्रमाणिक जैसे कद्दावर चेहरों को शामिल कर भाजपा ने हिंदुत्व, नारी शक्ति और उत्तर बंगाल के विकास का बड़ा संदेश दिया है. इन मंत्रियों का चयन न केवल प्रशासनिक बल्कि आगामी लोकसभा चुनावों के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. जिन पांच चेहरों को सुवेंदु मंत्रिमंडल में जगह मिली है, वे कितने सालों से बीजेपी के साथ हैं? सबों का पेशा क्या है? क्या इन चेहरों को 2029 लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर मंत्री बनाया गया है?
1. दिलीप घोष – दिग्गज संगठनकर्ता और जमीनी नेता
दिलीप घोष को बंगाल में भाजपा के उत्थान का मुख्य वास्तुकार माना जाता है. संघ के प्रचारक के रूप में अपना सफर शुरू करने वाले घोष ने 2015 से 2021 तक प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए भाजपा को शून्य से शिखर तक पहुँचाया. खड़गपुर सदर से विधायक और मेदिनीपुर के पूर्व सांसद घोष अपनी बेबाक बयानबाजी और “चाय पे चर्चा” जैसे अभियानों के लिए प्रसिद्ध हैं. उन्होंने भाजपा को कोलकाता के ड्राइंग रूम से निकालकर जंगलमहल और ग्रामीण बंगाल की झोपड़ियों तक पहुँचाया. कैबिनेट में उनकी मौजूदगी संगठन और सरकार के बीच एक मजबूत कड़ी का काम करेगी, जिससे हिंदुत्व और विकास के एजेंडे को धार मिलेगी.
2. अग्निमित्रा पॉल- नारी शक्ति और आधुनिकता का चेहरा
फैशन की दुनिया से राजनीति के अखाड़े में उतरीं अग्निमित्रा पॉल ने खुद को एक जुझारू नेत्री के रूप में स्थापित किया है. आसनसोल दक्षिण से लगातार दूसरी बार जीत दर्ज करने वाली अग्निमित्रा पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष भी हैं. उन्होंने संदेशखाली जैसी घटनाओं के दौरान महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर टीएमसी सरकार को जमकर घेरा था. कैबिनेट में उन्हें शामिल करना भाजपा के ‘नारी शक्ति’ संकल्प को दोहराता है. वह शहरी मतदाताओं और महिलाओं के बीच भाजपा की साख मजबूत करने के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्रों के विकास में भी अहम भूमिका निभाएंगी
